महाकालेश्वर
महाकालेश्वर

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन , मध्य प्रदेश में स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और विश्व के एक प्रमुख शैव(शिव) तीर्थ स्थलों में से एक है। मंदिर का नाम ‘महाकालेश्वर’ भगवान शिव के एक रूप महाकाल से लिया गया है। ये भगवान शिव का तीसरा ज्योतिर्लिंग है |

इस मंदिर का भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान है। महाकालेश्वर मंदिर के भीतर स्थित ज्योतिर्लिंग दक्षिण मुखी है, ये महादेव शंकर के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में अकेला ऐसा है । यह मंदिर प्राचीन काल में स्थापित किया गया था और बारह ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा जोतिर्लिंग माना जाता है। मंदिर के आस-पास विभिन्न धार्मिक स्थल हैं जिन्हें लोग दर्शन करने आते हैं।

यह क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है | क्षिप्रा नदी के तट पर ही हर 6 और 12 साल के अंतराल पर हिन्दू आस्था के महाकुम्भ का आयोजन होता है | क्षिप्रा नदी के तट पर ही महाकाल महादेव का ज्योतिर्लिंग स्थापित है | प्राचीन काल से ही उज्जैन क्षेत्र हिन्दू आस्था का केंद बिंदु रहा है साथ ही साथ उज्जैन क्षेत्र को आर्यवर्त /भारत का पुराना समय निर्धारण केंद माना जाता रहा है | आइये जानते है मंदिर आने का विवरण और इससे जुडी कहानीयां —–

Table of Contents

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन का इतिहास –
History of Mahakaleshwar Temple

महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास तीसरी शाताब्दी से भी ज्यादा पुराना माना जाता है । इसे हिन्दुओ की आस्था का केंद्र बिंदु माना जाता था । उज्जैन में 1107 ई. से 1728 ई. तक यवनों का शासन था । इस समय अवधि में उज्जैन ने अपनी हिन्दू पहचान को लगभग खो सा दिया था । 1690 ई. के मध्य में मराठों ने मालवा क्षेत्र पर आक्रमण किया और कई छोटी बड़ी लड़ाइयों के बाद 29 नवंबर 1728 को मालवा क्षेत्र में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया | मराठो ने मालवा क्षेत्र की राजधानी के रूप ने उज्जैन को चुना और 1731 से 1809 तक उज्जैन मालवा की राजधनी बना रहा।

मराठो के शासनकाल मे उज्जैन को उसकी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस मिली । मराठो ने महाकालेश्वर मंदिर का पुनर्निर्माण कराया और क्षिप्रा के तट पर सिंहस्थ कुम्भ के आयोजन की शुरुआत की । बाद में मालवा के राजा भोज ने भी मंदिर के विस्तार और आयोजनों को जारी रखा । मंदिर क्षेत्र के विस्तार और निर्माण में अलग – अलग समय पर बहुत से राजाओं , धनिकों और धार्मिक लोगो का सहयोग रहा ।महाकाल उज्जैन का इतिहास बहुत की उतार चढाओ वाला रहा है | विदेशी आकर्न्तो से ये भी भारत के अन्य मंदिरों की तरह प्रभावित रहा है |

महाकालेश्वर

महाकालेश्वर उज्जैन की संरचना-Structure of Mahakaleshwar Temple

महाकालेश्वर मंदिर मराठा, भूमिज, चालुक्य और मुगल शैलियों की वास्तुकला का एक सुंदर और कलात्मक मेल है। यह पवित्र मंदिर एक झील के पास स्थित है ।इस मंदिर में पांच मंजिले हैं, जिनमें से एक जमीन के अंदर स्थित है। यहां पर महाकालेश्वर की विशाल मूर्ति गर्भगृह (जमीन के अंदर) में स्थित है और यह दक्षिणामुखी मूर्ति है, जिसका अर्थ है दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाली मूर्ति। ये विशेषता महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकलेश्वर ज्योतिर्लिंग में ही पाई जाती है ।

मंदिर के मध्य भाग अर्थात तीसरे तल पर ओंकारेश्वर महादेव और शीर्ष तल अर्थात पंचम तल पर नागचंद्रेश्वर महादेव के लिंग स्थापित हैं। लेकिन आप नागचंद्रेश्वर की मूर्ति दर्शन सिर्फ नाग पंचमी के अवसर पर ही कर सकते हैं , क्योंकि इसको केवल इस खास मौके पर ही आम जनता के दर्शन के लिए खोला जाता है। इस मंदिर के परिसर में एक बड़ा कुंड भी है जिसको कोटि तीर्थ के रूप में जाना-जाता है। इस बड़े कुंड के बाहर एक विशाल बरामदा है, जिसमें गर्भगृह को जाने वाले मार्ग का प्रवेश द्वार है। इस जगह गणेश, कार्तिकेय और पार्वती के छोटे आकार के मूर्ति भी देखने को मिलती हैं।

मंदिर का क्षेत्रफल १०.७७ x १०.७७ वर्गमीटर और ऊंचाई २८.७१ मीटर है।यहां आने वाले विशाल भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए बिड़ला उद्योग समूह के द्वारा १९८० के सिंहस्थ के पूर्व एक विशाल सभा मंडप का निर्माण कराया गया है ।मंदिर के 118 शिखर मंडप पर सोने की परत चढ़ाई गयी है ।गर्भगृह के कपाट चाँदी के बने है और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सम्मुख नंदी जी की विशाल प्रतिमा स्थापित है |

महाकालेश्वर मंदिर का रहस्य- Mystery of Mahakaleshwar Temple in Hindi

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ये इस ज्योतिर्लिंग को भगवान शिव के सबसे खास ज्योतिर्लिंग के रूप में माना जाता है । ये श्लोक प्रचलित है –
” आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम्। भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते।।”

अर्थात आकाश में तारक शिवलिंग, पाताल में हाटकेश्वर शिवलिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है। यहां स्थित शिवलिंग का दक्षिणमुखी होना भी रहस्य मय है क्योंकि महादेव का कोई और ज्योतिर्लिंग दक्षिणमुखी नही है । भारत के प्रमुख 10 तंत्र सिद्धि मंदिरों में महाकाल के मंदिर का स्थान माना जाता है ।माना जाता है कि सभी प्रकार के दोष को समाप्त करने और मन को शांति प्रदान करने की शक्ति यहां प्राप्त होती है ।

इसके महत्वपूर्ण इतिहास, संस्कृति, और धार्मिकता में छिपा हुआ है, जो इसे भारतीय धरोहर का एक महत्वपूर्ण तत्व बनाते हैं।लोगो का मनना है कि मंदिर के शीर्ष पर विराजमान श्री नाग चंद्रेश्वर महादेव के दर्शन कर लेने से हर प्रकार के सर्प रोगों से मुक्ति मिल जाती है किन्तु इसके दर्शन वर्ष में केवल एक दिन नागपंचमी को ही होते है ये भी बड़ा रहस्य है |इस ज्योतिर्लिंग को सनातन मान्यता के अनुसार समस्त पृथ्वी की नाभि बिंदु के रूप में माना जाता है |

आज के आधुनिक युग में जब हम गीनविच से विश्व का समय आकलन करते है तब प्राचीन भारत में उज्जैन को समय निर्धारण का केंद्र बिंदु मान कर समय का निर्धारण होता था | उस समय में कर्क रेखा के गमन मार्ग का ज्ञान न होते हुए भी ऐसा करना रहस्यमय है | कर्क रेखा मंदिर के बहुत निकट से गुजरती है | उज्जैन को कुछ लोग सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का केंद्र बिंदु भी मानते है जो सच में एक रहस्य ही है |

महाकालेश्वर मंदिर की पौराणिक कहानी

पौराणिक कहानी की बात करे तो मंदिर से जुडी कई कहानिया प्रचलित है किन्तु सबसे ज्यादा मान्य है कि एक बार श्री ब्रह्मा और श्री विष्णु के मध्य क्ष्रेष्ट कौन है इसे लेकर प्रतिष्पर्धा होने लगी जिसके समाधान के लिए आदि योगी शिव ज्योति स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए और बोले आप दोनों में जो इस स्तम्भ ज्योति का अंत पहले पा जायेगा वही विजेता होगा |

ब्रह्मा और विष्णु जी स्तम्भ के आरम्भ बिंदु की खोज में चल दिए किन्तु उन्हें स्तम्भ का अंत नही मिला | परन्तु ब्रह्मा जी ने झूट बोल दिया की उन्हें अंत मिल गया ,भगवान विष्णु ने हार मान ली | किन्तु भगवान शंकर ने ब्रह्मा जी के झूट को पकड़ लिया और बोले अब आपकी पूजा किसी भी धर्म आयोजन में नही होगी जबकि विष्णु जी की पूजा सभी धार्मिक आयोजनों में होगी ऐसा वरदान दिया | माना जाता है वो ज्योति स्तम्भ ही महाकाल महादेव का यह ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर है |

महाकालेश्वर मंदिर कैसे पहुँचे-How To Reach Mahakaleshwar Temple in Hindi

मंदिर दर्शन करने आने के लिए आप बस या कार , ट्रेन या हवाईजहाज से यात्रा करके यहां आ सकते है। महाकालेश्वर मंदिर पहुँचने के लिए आप निम्न तरीके का उपयोग कर सकते हैं:-

हवाई मार्ग

आप अपने शहर के नजदीकी विमानस्थल(एयरपोर्ट) से इंदौर शहर में अहिल्या बाई होल्कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक हवाई यातायात के द्वारा पहुँच सकते है। एयरपोर्ट से महाकालेश्वर मंदिर टैक्सी और बस सेवाओं के जरिए आसानी से आया जा सकता है ।
एयरपोर्ट से महाकालेश्वर मंदिर की दूरी 55 किलोमीटर है ।

रेल मार्ग

उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन है और यह देश के अन्य शहरों से रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से महाकालेश्वर मंदिर टैक्सी, ऑटोरिक्शा, बस या अन्य सार्वजनिक वाहनों के जरिए पहुँचा जा सकता है।
उज्जैन रेलवे स्टेशन से महाकालेश्वर मंदिर की दूरी 5 किलोमीटर है ।

सड़क मार्ग

महाकालेश्वर मंदिर दर्शन करने आने के लिए आपको अपने शहर के मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर आना होगा । उज्जैन आने के लिए आपको सड़क मार्ग की बेहतर व्यवस्था मिल जाएगी आप भारत के किसी भी हिस्से से यहां अपनी कार या टूरिस्ट बस के माध्यम से आ सकते है । उज्जैन आने के बाद यहां से मंदिर की दूरी 5 किलोमीटर रह जाती है ।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से उज्जैन की दूरी -139 किलोमीटर

इंदौर से उज्जैन की दूरी – 55 किलोमीटर

ध्यान देने वाली बात है कि मंदिर के आसपास यातायात और पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होती है, लेकिन यहां अधिक भक्तों के आने पर रात्रि और विशेष धार्मिक अवसरों पर ठीक से अव्यवस्थित न हो सके। इसलिए, आपको अपनी यात्रा की अवधि में सुविधाएं और यातायात को समझने के लिए अपनी यात्रा के पहले जांच करना उचित होगा |

जानिए शिव के पहले ज्योतिर्लिग सोमनाथ की कहानी दर्शन यात्रा

मंदिर दर्शन की व्यवस्था-Mahakaleshwar Temple Visit

मंदिर पहुच कर आपको सबसे पहले यहां रुकने की व्यवस्था कर लेनी चाहिए । यहां एक रात होटल में रुकने के लिए रूम आपको 600 से 800रुपये में नॉन AC और 900 से 1500 रुपये में AC रूम मिल जाएगा । इसके बाद स्नान करके होटल से या क्षिप्रा नदी से आपको मंदिर परिसर में आना चाहिए यहां पर लॉकर रूम लेकर अपने मोबाइल फ़ोन , कैमरा ,घड़ी , बेल्ट , पर्स को जमा कर दे ।

उसके बाद आप टिकट काउन्टर पर टिकट लेने के लिए लग जाये यहां सामान्य दर्शन टिकट निःशुल्क आपको मिल जाएगा । वही अगर आप शीघ्र दर्शन करना चाहते है तो आपको 250 रुपये का vip टिकट लेना होगा ।
सामान्य दर्शन टिकट से जहां लगभग 3-4 घंटे दर्शन को लगते है वही vip टिकट से ये समय लगभग 25 से 40 मिनट का हो सकता है ।
गर्भ गृह के दर्शन दोनों सामान्य या vip टिकट वाले को दूर से कराए जाते है । vip टिकट वाले सामन्य टिकट वालो के आगे से दर्शन प्राप्त करते है |

मंदिर में प्रवेश करते ही आपको शिव महाकाल के दर्शन की अभिलाषा के साथ उनका स्मरण करते हुये आगे बढ़ना चाहिए मंदिर के गर्भ गृह में नंदी महाराज के सामने आपको महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन होंगे ।इनकी अनुपम छवि को मन में बैठा कर आगे बढ़िए मंदिर के तीसरे तल पर ओंकारेश्वर स्वरूप के दर्शन होंगे । पंचम तल पर श्री नागचंद्रेश्वर महादेव की प्रतिमा विराजमान है जिसके दर्शन श्रद्धालुओं को केवल नागपंचमी के दिन ही करने को मिलते है आप मंदिर से बाहर आ जाइये ।

महाकाल की भस्म आरती-
Bhasma Aarti of Mahakaleshwar Temple in Hindi

महाकाल की भस्म आरती

महाकाल की भस्म आरती सुबह भोले शंकर को जगाने के लिए उनकी पहली आरती भस्म आरती की जाती है | ये विश्व में शिव जी का अकेला स्थान है जहाँ भस्म आरती की जाती है | ये भस्म शमशान में आखिरी या ताजे जले हुए शव की राखी होती है | यहाँ की भस्म आरती विश्व प्रसिध्य है |इसे देखने के लिए विश्वभर से शिव भक्त यहाँ आते है |

जुना अखाडा के संत ही इनकी भस्म आरती करते है ये संत सोमवार को विशेष भस्म आरती में शामिल होते है |आज में लगभग 16 परिवार के पुजारियों को ही भस्म आरती करने का अधिकार प्राप्त है ये ही नित्य भस्म आरती को संपन कराते है |भस्म आरती से पूर्व जलाभिषेक भी कराया जाता है |

महाकाल की भस्म आरती का टिकट- Bhasam Aarti Ticket online & Offline

महाकाल की भस्म आरती का टिकट आपको यहाँ पर बने काउंटर से एक दिन पहले ही लेना होता है ये टिकट केवल पहले 300 लोगो को ही दिया जाता है | इस टिकट को लेने के साथ ही आपके पास आधार कार्ड जैसा पहचान पत्र का होना आवशयक है | भस्म आरती का टिकट काउंटर पर 100 रूपये प्रति व्यक्ति प्राप्त किया जा सकता है | एक व्यक्ति एक साथ अधिकतम 5 टिकट ही ले सकता है |

आप भस्म आरती के लिए ऑनलाइन भी टिकट बुक कर सकते है इसके लिए आपको मह्कालेश्वर मंदिर की वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.com पर जाना होगा ,यहाँ आप अपने आगमन और आरती तिथि के विवरण के साथ कुछ सामान्य विवरण आपने विषय में देकर टिकट बुक करा सकते है | यहाँ आने से 1 महीने से पूर्व ही आपको ऑनलाइन टिकट बुक कर लेना चाहिए | क्यूंकि यहाँ की ऑनलाइन भस्म आरती टिकट बहुत जल्दी ही बुक हो जाती है | ऑनलाइन भस्म टिकट के लिए आपको 200 रूपये देने होंगे |

मंदिर में भस्म आरती के अतरिक्त भी कई आरती और पूजन होता है | भस्म आरती का समय सुबह 4 बजे से 6 बजे का होता है |जबकि अन्य आरती का विवरण सामान्य दिनों में निम्नवत रहता है |महाकालेश्वर उज्जैन दर्शन का समय सरणी निचे दी गयी है |

चैत्र माह से आश्विन-
सुबह की पूजा: सुबह 7:00- सुबह 7:30 बजे
मध्याह्न पूजा: सुबह 10:00 – सुबह 10:30 बजे
शाम की पूजा: शाम 5:00 बजे – शाम 5:30 बजे
श्री महाकाल संध्या आरती: शाम 7:00 बजे – शाम 7:30 बजे
बंद करने का समय शयन आरती : रात 10:30 बजे-11:00

कार्तिक से फाल्गुन माह तक
सुबह की पूजा: सुबह 7:30 –सुबह 8:00
मध्याह्न पूजा:सुबह 10:30 – सुबह 11:00
शाम की पूजा: शाम 5:30 बजे – शाम 6:00 बजे
श्री महाकाल आरती: शाम 7:30 बजे – रात 8:00 बजे से
बंद करने का समय शयन आरती : रात 10:30 बजे से रात 11:00 बजे

गर्भगृह दर्शन व्यवस्था

अगर आप महाकालेश्वर मंदिर में भगवान भोले नाथ के ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के दर्शन गर्भ गृह में जा कर करना चाहते है तो आपको इसके लिए प्रति व्यक्ति 1100 रूपये और महिला-पुरुष साथी (कपल के रूप में ) 1500 रूपये देने होंगे | मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड निर्धारित किया गया | मंदिर के गर्भ गृह में पुरुष धोती और कनाह्वर (गमछा) के साथ ही प्रवेश कर सकते है जबकि महिलाओं के लिए साड़ी में होना अनिवार्य है |

मंदिर परिसर में विभिन्न पूजन , दर्शन प्रकिया के नियम और मानको में परिवर्तन होता रहता है इसलिए मंदिर दर्शन करने जाने से पूर्व मंदिर की वैबसाइट का अवलोकन अवश्य करले |

महाकाल के दर्शन के उपरांत आपको मंदिर परिसर में विराजमान अन्य देवी देवताओं के प्रतिमाओं के भी दर्शन करने चाहिए । इनमे गणेश , पार्वती जी ,और हनुमान जी आदि की प्रतिमाएं स्थापित है ।इस प्रकार आपकी महाकालेश्वर महादेव की दर्शन यात्रा सम्पन हुई । आइये जानते है अन्य महत्वपूर्ण दर्शन स्थल जो मंदिर परिसर के आस पास स्थित है |

उज्जैन के 10 महत्वपूर्ण दर्शन स्थल

1- बड़े गणेश जी का मंदिर

ये मंदिर महाकालेश्वर मंदिर परिसर के ठीक सामने स्थित है यहां पर गणेश जी की विशाल प्रतिमा स्थापित है । लोग यहां आने पर इनका भी दर्शन अवश्य करते है ।

2- भारत माता मंदिर

ये मंदिर 2008 में बन कर तैयार हुआ है , इस मंदिर में माँ भारती के दिव्य स्वरूप को स्थापित किया गया है । इस मंदिर में भारत की महान विभूतियों की प्रतिमाओं को स्थापित कर लोगो के दर्शन के लिए बनाया गया है । यहां लोग पर्यटन के लिए आते है और इसकी बनावट और अपने पूर्वजों के योगदान को समझते है ।

3- हरसिद्धि माता का मंदिर

ये मंदिर देवी का शक्तिपीठ माना जाता है । यहाँ देवी दुर्गा के स्वरूप की स्तुति की जाती है । लोगो के मन मे इस मंदिर को लेकर बहुत आस्था है । यहां होने वाली सान्ध्या आरती विश्व प्रसिद्ध है । लोग शाम में 7 बजे यहाँ इस विशाल आरती को देखने आते है ।

4- क्षिप्रा नदी का रामघाट

प्रसिद्ध क्षिप्रा नदी के तट पर बना ये रामघाट बहुत प्रसिद्ध है । क्षिप्रा नदी पर आयोजित होने वाले कुम्भ मेले में जो हर 6 वर्ष और 12 वर्ष के अंतराल पर होता है रामघाट की खूब ख्याति रहती है । नदी के तट पर बने सभी घाटों में इसे विशेष माना जाता है । लोग यहां की सान्ध्या आरती में सम्मिल हो कर और नदी क्षेत्र की शांति महसूस करते है

5 . मंगल नाथ मंदिर

ये मंदिर अपने कर्मकांड के विधि और उपचार के लिए प्रसिद्ध है । लोगो की मान्यता है कि इस मंदिर परिसर में पूजन करने से मंगल ग्रह का दोष, नाग दोष आदि विभिन्न प्रकार के जीवन दोषों से मुक्ति मिल जाती है । कुछ लोगो का कहना है कि प्रसिद्ध अदाकारा ऐश्वर्याराय बच्चन ने भी यहां मंगल दोष निवारण के लिए पूजन करवाया था ।

6- गढ़कालिका देवी मंदिर

ये मंदिर यहां के लोकल लोगो के मान्यताओं और आराधनाओं का पूजनीय स्थान है । लोगो का मानना है कि ये राजा भोज की कुल देवी है । स्थानीय लोगो की माता के इस स्वरूप में अटूट श्रद्धा है । ये मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।

7 – काल भैरव का मंदिर

ये मंदिर उज्जैन धर्म यात्रा के प्रमुख मंदिरों में एक है । भगवान शंकर के अंश स्वरूप भैरव नाथ का ये मंदिर यहां चढ़ने वाले प्रसाद के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भैरव नाथ को प्रसाद रूप में मदिरा / शराब चढ़ता है । लोगो की मान्यता है कि महाकालेश्वर दर्शन यात्रा बिना यहां दर्शन के पूर्ण नही होती है ।

8- राजा भृतहरि की गुफा

यहां दो गुफायें है माना जाता है कि शिव भक्त राजा भृतहरि ने यहां कठिन तपस्या की थी । लोग यहां अपनी मनोकामनाओ की पूर्ति की प्रार्थना के लिए यहां आते है । स्थानीय लोगो का मानना है कि शिव के अनन्य भक्त श्री गोरखनाथ ने भी यहां तपस्या की थी । इसलिए भी इस जगह की प्रख्याति बहुत अधिक है ।

9- जंतर मंतर या वेधशाला उज्जैन

जंतरमंतर उज्जैन शहर में स्थित है। यह भारत के प्रमुख जंतरमंतरों में से एक है और भौगोलिक और ज्यामितीय अनुसंधान के लिए उपयोगी है।उज्जैन के जंतरमंतर को राजा महाराजा जयसिंह (जयवन्त सिंधिया) द्वारा बनवाया गया था, जो उदयपुर राजवंश के शासक थे। इसे 1725 में बनाया गया था। जंतरमंतर उज्जैन विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित है और यह भौगोलिक और खगोलशास्त्रीय अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।जंतरमंतर एक प्राचीन यंत्रगृह है जिसमें विभिन्न यंत्रों का उपयोग सूर्य, चंद्रमा, और ग्रहों के गतिविधियों को अध्ययन करने के लिए किया जाता था। यह भारतीय खगोलशास्त्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण संस्थान है जो भारतीय वैज्ञानिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंश है।

10- ऋषि संदीपनी आश्रम

संदीपनी आश्रम उज्जैन मध्य प्रदेश, भारत में स्थित है। यह भारतीय महाकाव्य “महाभारत” के कथानक में भगवान कृष्ण, बलराम और संदीपनी ऋषि के अध्ययन का स्थान माना जाता है।संदीपनी आश्रम भारतीय संस्कृति में एक पवित्र स्थल माना जाता है, जहां भगवान कृष्ण और उनके सहयोगी बलराम ने शिक्षा ली थी।

संदीपनी ऋषि ने उन्हें अलग-अलग शास्त्रों, विज्ञान, और योग के ज्ञान का उपदेश दिया था।यहां संदीपनी आश्रम में कृष्ण और बलराम ने ब्रह्मचर्य की शिक्षा ली और उज्जैन के विभिन्न स्थलों में अलग-अलग शिक्षा द्वीप के रूप में भ्रमण किया। संदीपनी आश्रम का नाम भगवान कृष्ण के अध्ययनी ऋषि संदीपनी के नाम से जुड़ा हुआ है।ये लोगों को भारतीय धरोहर, संस्कृति और धार्मिक दृष्टिकोन से अवगत कराता है। यहां पर भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थान हैं जिन्हें पर्यटक देखते हैं ।
कृष्ण लीला के प्रसिद्ध कथानक सुदामा से श्री कृष्णा की मित्रता यही हुई थी ।

शिव के दुसरे ज्योतिर्लिंग श्री मल्लिकार्जुन महादेव की दर्शन यात्रा के लिए यहाँ क्लिक करे

महाकाल लोक उज्जैन (Mahakal Lok)

mahakal lok

उज्जैन की भव्यता को और आकर्षित बनाने के उदेश्य से भारत की केंद्र सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से महाकाल लोक उज्जैन का निर्माण कराया गया है | इसके अंतर्मंगत मंदिर के क्षेत्र को 2.82 हेक्टयर से बढ़ा कर 47 हेक्टयर किया गया है इसमें 17 हेक्टयर में फैला रूद्र सगार झील सम्लित है |

महाकाल लोक में प्रवेश के लिए दो द्वार बनाये गए है | पहला पिनाकी द्वार और दूसरा नंदी द्वार नाम दिया गया है | महाकाल लोक के निमार्ण का उद्देश्य प्रति वर्ष उज्जैन आने वाले 1.5 करोड़ पर्यटकों की संख्या में वृद्धि करके 3 करोड़ तक ले जाना है |

एक 900 मीटर पैदल यात्री गलियारे का निर्माण किया गया है, जो प्लाज़ा को महाकाल मंदिर से जोड़ता है, जिसमें शिव विवाह, त्रिपुरासुर वध, शिव पुराण और शिव तांडव स्वरूप जैसे भगवान शिव से संबंधित कहानियों को दर्शाते 108 भित्ति चित्र एवं 93 मूर्तियाँ हैं।

दो फेज में निर्माण किये गए इस महाकाल लोक उज्जैन का शुभारम्भ भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के द्वारा 21 अक्टूबर 2022 को किया गया है | इसके निर्माण में कुल 856 करोड़ की धनराशि खर्च की गई है |

यदि आप उज्जैन घुमने आने का प्लान बना रहे है तो आप रात्रि में महाकाल लोक उज्जैन का भ्रमण अवश्य करे | रात्रि के समय इसकी लाइटिंग और फौवारे आपको मन्त्र मुग्ध कर देंगे | महाकाल पर्यटकों के लिए सुबह 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक खुला रहता है | यहाँ पर प्रवेश निशुल्क है |

इस प्रकार हमने आपको उज्जैन महाकाल की यात्रा के लगभग सभी महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में बताने का प्रयास किया | यदि आप यात्रा करने का विचार बना रहे है तो हमारे द्वारा बताये गए बातो को स्मरण में रखियेगा | हमारा प्रयाश आपके यात्रा में सहायक सिद्ध होगा | समय-समय पर होने वाले बदलाव और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में अधिक जानकारी के लिए मंदिर की वेबसाइट का अवलोकन जरुर करे |

हमारे साथ जुड़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपको हमारे सुझाव कैसे लगे हमें अवश्य कमेन्ट करके बताये | साथ ही साथ ये जानकारी अपने मित्रो और संबंधियों को शेयर करे | आपको यात्रा की शुभकामनाएं |

जय महाकाल

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